Saturday, April 2, 2011
क्यों न मनाये दिवाली, क्यों न खेले होली
वानखेडे में हिंदुस्तान ने श्रीलंका की कर दी खाट खड़ी, क्रिकेट इतिहास के पन्नों में जोड़ दी एक नई स्वर्णिम कड़ी, तोड़ा मेजबान के न जीतने का मिथक, एक नई कहानी जोड़ी, टीम इंडिया का जोश देख विदेशी भारतीयों में भी आनंद की लहर दौड़ी, पूरा हिंदुस्तान हुआ मद-मस्त, जगह-जगह मनी होली-दिवाली, क्यों न मनाये दिवाली, क्यों न खेले उत्साह और उल्लास की होली, 28 साल लगे हमें, विश्व कप से भारत माता की फिर से भरने झोली, अवतरित हुई हमारी अगली पीढ़ी, पहुंच गई सवा अरब तक आबादी, नहीं छोड़ा फिर भी विश्वास, छाई रही दिलों पर विश्व कप की खुमारी, आखिर आया वो दिन, जिसने जोड़ी हिंदुस्तानियों की उम्मीदें सारी, आई त्यौहार सरीखी खुशियां, भड़की जोश-ए-जश्न की चिंगारी, इस जश्न का सिलसिला अगले विश्व कप तक रहें यूं ही जारी परमपिता परमात्मा से यह विनम्र प्रार्थना है हमारी।
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